अल्मुन्तज़र हिंदी – मुहर्रम १४३१ह

सब्र का लफ्ज़ हर समाज और हर मुआशरे में कम से कम पढ़े लिखे लेगों के नोके ज़बान पर रहता है !  शऊर की आंखे खुलने के बाद से आख़ेरी साँस तक सब्र ज़ख़महाए जिगर पर म्दवाए दर्द बन क्र उभरता है!…

 

…जारी

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